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प्रशंसापत्र

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1. तमिलनाडु विद्युत बोर्ड द्वारा ग और घ वर्ग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिए जाने पर व्यक्त की प्रसन्नता; प्रचालन में उल्लेखनीय सुधार
तमिलनाडु इलेक्ट्रीसिटी बोर्ड का मानव संसाधन विकास विंग आरईसी की वित्तीय सहायता से टीएनईबी के ग और घ वर्ग के कर्मचारियों के लिए 'विद्युत वितरण में सुधार' विषय पर राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन में बोर्ड की उपलब्धियों को मान्यता देने के लिए आरईसी के प्रति आभार व्यक्त करता है। वर्ष 2009-10 के दौरान 3668 कर्मचारियों को इस कार्यक्रम में प्रशिक्षित किया गया और उन्हें निम्नलिखित लाभ हुएः
· टीएनईबी के समूह ग और घ कर्मचारियों में समेकित तकनीकी और वाणिज्यिक क्षतियों को कम करने के प्रति जागरूकता पैदा हुई। उन्हें डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर स्ट्रक्चर, एचटी और एलटी लाइनों की मानक इरेक्शन परिपाटियों में प्रशिक्षित किया गया, जिसके परिणामतः उपस्कर और लाइनों के ब्रेकडाउन में कमी आई है। उन्हें डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मरों की अर्थिंग और इनकी एचटी और एलटी की विविध लाइनों के संबंध में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया और उपस्करों के खराब होने की स्थिति में उचित अर्थिंग की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया गया।
· डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर स्ट्रक्चर, एचटी और एलटी लाइनों के पहलुओं का अनुरक्षण और वितरण ट्रांसफार्मरों के फेल होने, लाइनों के ब्रेक डाउन को कम करने में इन मदों के अनुरक्षण के प्रभाव और क्षतियों को कम करने के बारे में भी उन्हें प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें प्रभावी सर्विस कनेक्शनों से संबंधित मानक प्रक्रिया का भी प्रशिक्षण दिया गया ताकि उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा सुनिश्चित की जा सके और वाणिज्यिक क्षतियों को कम करने के लिए ऊर्जा की चोरी को रोका जा सके। वीएआर कंपन्सेशन के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
· सुरक्षा की प्रक्रिया और औजारों के सुरक्षित रखरखाव पर भी चर्चा की गई ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके। कर्मचारियों के विश्वास को बढ़ाने के लिए अग्निशमन संबंधी सत्र में व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया ताकि अग्नि संबंधी दुर्घटना के दौरान सही प्रकार के अग्निशामक यंत्रों की पहचान और प्रयोग किया जा सके। प्रशिक्षार्थियों को प्राथमिक चिकित्सा का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया ताकि वे दुर्घटना संबंधी आपात स्थिति में व्यक्ति के बचाव के लिए सही पद्धति/प्रक्रिया अपना सकें।
· टीएनईबी के ग और घ वर्ग के कर्मचारियों को राष्ट्रीय मानकों और प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया। 40औ सिद्धांत और 60औ व्यवहार वाले सत्रों के मॉडय़ूल के डिजाइन काफी प्रभावी रहे। इस प्रशिक्षण में कर्मचारियों को यह महसूस करवाया गया कि वे उपभोक्ताओं को विश्वसनीय बिजली की आपूर्ति संबंधी राष्ट्रीय मिशन के अंग हैं। उन्होंने इस बात पर गौरव महसूस किया कि देश ने उनकी क्षमता निर्माण के बारे में सोचा है। वे इस बात से प्रसन्न थे कि उन्होंने राष्ट्रीय प्रमाणन के साथ अपनी मातृभाषा में पहली बार राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया।
(मुख्य अभियंता- एपीडीआरपी तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कारपोरेशन लिमिटेड से प्राप्त सूचना पर आधारित)।
 
 
2. एमपीपीएकेवीसीएल, इंदौर ने ग और घ वर्ग के कर्मचारी और फ्रैंचाइजी प्रशिक्षण कार्यक्रम के संबंध में अपना फीडबैक इस प्रकार दिया:
“हमें फ्रैंचाइजी और ग और घ वर्ग के कर्मचारियों के लिए आरईसी द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के लाभ दिखाई देने शुरू हो गए हैं। इस प्रशिक्षण का फीडबैक सकारात्मक ही नहीं है, अपितु उत्कृष्ट है। यह बात सब लोग भली-भांति जानते हैं कि कार्यस्थल पर प्रौद्योगिकी बहुत तेजी से बदल रही है और जो कंपनियां इसके साथ नहीं चलेंगी, वे प्रतियोगिता में पिछड़ जाएंगी। इसलिए प्रशिक्षण की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है और इस संदर्भ में फ्रैंचाइजी तथा ग और घ वर्ग के कर्मचारियों के लिए आयोजित आरईसी के प्रशिक्षण कार्यक्रम से समग्र लक्ष्य और उद्देश्य प्राप्त करने में इस संगठन को सहायता मिली है। फ्रैंचाइजी प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद अधिकांश प्रतिभागियों ने कहा कि ग्रामों के विकास और बिजली वितरण सेवा में सुधार के लिए यह बहुत ही सकारात्मक कदम है। कई प्रतिभागियों ने इसमें रुचि दिखाई है और उन्होंने अपने कॅरियर के रूप में विद्युत वितरण फ्रैंचाइजी का कार्य करने की इच्छा जताई है।
ग और घ वर्ग के प्रशिक्षण कार्यक्रम - प्रकार- I से कर्मचारियों में अपनत्व और सुरक्षा की भावना पैदा हुई है। इससे हमारे कर्मचारी इस बात के लिए भी अभिप्रेरित भी हुए हैं कि वे अपने विद्यमान ज्ञान द्वारा कार्य में और दक्षता लाएं और इससे उन्हें अपने पर्यवेक्षकों और साथियों के साथ बातचीत करने का अवसर भी मिलता है। इस बात पर बल देना उपयोगी होगा कि प्रकार-I के इस व्यापक प्रशिक्षण से बिजली संबंधी दुर्घटनाओं को कम करने में काफी सहायता मिली है, क्योंकि इससे व्यावहारिक ज्ञान और नए-नए विचारों को प्राप्त करने का एक ठोस मंच प्राप्त हुआ है।
ग और घ वर्ग के प्रशिक्षण कार्यक्रम - प्रकार- III से संगठन में बहुत उत्साह पैदा हुआ है। उल्लेखनीय है कि यह एक बहुत महत्वपूर्ण प्रशिक्षण है, जो पहले नियमित रूप से नहीं हुआ करता था। इस प्रशिक्षण से कर्मचारियों में बहु-उद्देश्यीय सोच विकसित हुई है जिससे उन्हें स्थापना, राजस्व, बुक कीपिंग, निर्माण कार्य, स्टोर आदि जैसी विभिन्न विधाओं की जानकारी हुई है। अब इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने सभी स्तर के अधिकारियों में प्रोत्साहन की भावना भरी है और वे भारी नियोजन में सहयोग दे सकते हैं।
हमें आरईसी के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को आयोजित करने में प्रसन्नता हुई है, क्योंकि इससे नियोजक और कर्मचारियों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करने में संगठन को लाभ हुआ है। इससे हम सामाजिक रूप से जिम्मेदार संगठन के रूप में भी स्थापित हुए हैं।
(स्रोतः एम आर नटराजा, मानव संसाधन प्रबंधक)
 
3. फ्रैंचाइजीज द्वारा ग्रामीण विद्युत वितरणः एपीडीसीएल
एपीडीसीएल ने ग्रामीण विद्युत वितरण का कार्य फ्रैंचाइजी को सौंपने का निर्णय लिया है ताकि ग्रामीण उपभोक्ताओं को बेहतर और तत्काल सेवा मुहैया कराई जा सके, राजस्व वसूली बढ़ाई जा सके, बिजली की चोरी रोकी जा सके और ग्रामीण वितरण फ्रैंचाइजी किसी स्तर तक ऐसा लाभ कमा सकें, जिससे यह स्कीम लंबे समय तक चल सके। इस स्कीम में एकल बिंदु पर फ्रैंचाइजी को बिजली की आपूर्ति किए जाने का प्रावधान है। फ्रैंचाइजी के कार्यक्षेत्र में मीटर रीडिंग, बिलिंग, राजस्व वसूली और उपभोक्ताओं के अनुरोधों पर कार्रवाई करना शामिल है। उनसे यह अपेक्षा की गई है कि वे उपभोक्ता के रिकार्डों को विनियमित करें और दो माह के बिल की रकम को जमानती रकम के रूप में जमा करें। वितरण परिसंपत्तियों का स्वामित्व यूटिलिटी के पास रहेगा और वे डीटीआर, नेटवर्क आदि को बनाए रखने के लिए क्षतिग्रस्त मदों के स्थान पर दूसरी मदें उपलब्ध कराएंगे। फ्रैंचाइजी से अपेक्षा की गई थी कि वह 90औ की वसूली का लक्ष्य प्राप्त करेगा। इसके अलावा, उनके द्वारा की गई सेवाओं के लिए उन्हें 15औ कमीशन, 2औ अनुरक्षण भत्ता, समय पर अदायगी के लिए 3औ छूट और घरेलू उपभोक्ताओं के यूनिट प्रभारों पर 0.20 रुपए की रियायत दी जाएगी। मुख्य बल क्षतियों को 20-22औ तक कम करने पर दिया गया था, जिसके परिणामतः प्रति वर्ष 800 एमयू अतिरिक्त ऊर्जा उपलब्ध होगी और 240 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। तकनीकी क्षतियों को कम करने के लिए फ्रैंचाइजी प्रति चरण लोड, अर्थिंग में सुधार, जंपर कसने, बुशिंग रॉड्स, जॉइंट्स आदि के कनेक्शनों में कार्बन को साफ करने तथा एचटी, एलटी और डीटीआर के रखरखाव में संतुलन बनाए रखने का कार्य करेगा। इसी प्रकार वाणिज्यिक क्षतियों को कम करने के लिए फ्रैंचाइजी ने सभी ऊर्जा मीटरों को सील करने, पुराने और दोषपूर्ण मीटरों को बदलने, हुकिंग और मीटर से छेड़छाड़ करने की नियमति जांच करने, मीटर की नियमित रीडिंग करने और बिलिंग तथा राजस्व वसूली का कार्य किया। उपभोक्ताओं के रिकार्ड भी सही किए गए। इस तकनीक के परिणामतः वाणिज्यिक क्षतियों को कम करने के उपाय किए गए, समेकित तकनीकी और वाणिज्यिक क्षतियां 19औ तक कम की गई जबकि पहले ये 60औ तक होती थी, राजस्व वसूली 4 से 5 गुना बढ़ी और इससे उपभोक्ताओं की संतुष्टि में भी वद्धि हुई है
(श्री के मेधी यूथ-केयर द्वारा 4 जून, 2010 को लखनऊ में किए गए एकल प्वाइंट विद्युत आपूर्ति स्कीम संबंधी प्रस्तुतीकरण पर आधारित)

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